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Sunday, August 14, 2016

नियति

       बालकनी में टंगे पिजंरे में बने छोटे से झूले पर झूलता तोता, 'ट्वी -ट्वी ' कर रहा था।   पास ही पेड़ पर एक तोता भी 'ट्वी -ट्वी ' कर रहा था। शायद  पिंजरे वाला तोता उसी से बतिया रहा था।  पास ही कुर्सी पर बैठी कोमल दोनों की आवाजों में अंतर को सुन और पहचान रही थी। बाहर वाले तोते से पिंजरे वाले तोते की आवाज़ कितनी कर्कश थी। परतन्त्रता की एक पीड़ा भी झलक रही थी।
       आराम कुर्सी पर झूलती हुई कोमल सोच रही थी कि तोते और उसके जीवन में कितना साम्य है। दोनों ही पिंजरे में है। एक लोहे के रुपहले रंग में रंगे पिंजरे में और वह सोने के पिंजरे में !वह धीरे से उठी और पिजंरे का दरवाजा खोल दिया। यह क्या ? तोते ने तो बाहर निकलने का प्रयास ही नहीं किया।
         कोमल ने धीरे से हाथ से पकड़ कर उसे बाहर निकालना चाहा तो वह पिंजरे की दीवार से की ओर सरक गया। फिर भी कोमल ने उसे पकड़ कर बाहर निकालने की कोशिश की। तभी मुख्य दरवाजे पर आहट  हुई। तोता हाथ से छूट गया और वह झट से पिंजरे का दरवाजा बंद कुर्सी पर बैठ गई। उसकी कलाई तक चूड़ियां  पायल खनक गई !