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Saturday, January 28, 2012

प्रद्युमन


 (यह मैंने बहुत पहले लिखा था मेरे छोटे बेटे  प्रधुमन के जन्म  दिन पर ).......................
आज मेरे छोटे बेटे प्रधुमन का जन्म दिन है .पुरे १५ वर्ष का हो गया ,पर आज भी बहुत शरारती है .कभी छुप कर डरा देता है ...फिर कहता है की बुद्धू बनाया ,तो मैं हंस पड़ती हूँ कि अरे तुम तो मुझे अपने जन्म से पहले ही बुद्धू बनाने लग गए थे ...दो बार अस्पताल में भर्ती हो कर बेरंग वापिस आना पड़ा ,फिर कहीं कठिन -चिकित्सीय प्रक्रिया से गुजरने के बाद इसका जन्म हुआ .बिलकुल छोटा सा ,नन्हा सा, प्यारा सा प्रधुमन ........जब उसकी दादी ने उसके कोमल हाथों को मेरे चेहरे छुआया तो मैं अपनी सारी तकलीफ भूल गयी .
फिर कुछ महीनो बाद उसकी शरारतो का दौर शुरू हुआ तो ,वो अब तक जारी है ..नर्सरी क्लास में जो शिकायतों का दौर चला ..वो अब कुछ मंद हुआ है ....नर्सरी कि टीचर ने कहा कि मेरी क्लास में १० बच्चे नहीं बल्कि भूत है और आपका प्रधुमन उनका लीडर है ...जब भी स्कूल जाती तो मुझे कार के पीछे ट्रेक्टर कि ट्राली लगाकर ले जानी पड़ती क्यूंकि जाते ही मैं जिस -जिस टीचर से मिलती ,वही मुझे एक -एक, प्रधुमन की शिकायतों का टोकरा पकड़ा देती और इतनी सारी टोकरियाँ तो कार मैं नहीं आ सकती थी न !
एक रोज़ मैंने स्कूल जाते हुए जोर से डांटा कि अगर आज लड़ाई करोगे तो स्कूल में ही रह जाना घर मत आना ...वो कुछ नहीं बोला और गोल -गोल गाल फुला कर चला गया ....ढाई बजे ,बड़ा बेटा आया तो मैं किचन मैं खाना गर्म करने गयी ही थी कि एक नर्म -मुलायम शेर कि दहाड़ सुनायी दी ...मम्मा !!मम्मा !!!....मैं घबराकर बाहर भागी ,(सुबह वाली धमकी भूल चुकी थी )प्रधुमन कि टाई टेढ़ी ,गाल फूले हुए मुख पर गुस्सा ..इतना प्यारा लग रहा था कि मुझे बस उस पर प्यार ही आरहा था ....कि वो बोला ....मम्मा मैं आज फिर से झगड़ा कर के आया हूँ !!बोलो घर में आना है कि नहीं ....मुझे जोर से हंसी आयी वाह रे मेरे सपूत आजा -आजा ..एक बार अंदर तो आ....फिर बोला मैंने कुछ नहीं किया मेरे दोस्त ने कहा कि उसकी मम्मा ज्यादा अच्छी है ...मैंने कहा कि मेरी मम्मा ज्यादा अच्छी है .....तो मैंने उसे पीट दिया .मेरी क्या गलती ....
पढाई के नाम पर उसे भूख लगती ,फिर बाथरूम जाना है ..अब तो मुझे नींद आ रही है ,एक दिन मैंने डांटा कि आँखों में नींद ही नहीं है कहाँ से आएगी ?? तो अगले दिन पदाई करते समय अपनी आँखें सिकोड़ कर बैठ गया मैंने पूछा तो बोला कि देखो आँखों में नींद है ..अब कैसे पढूं !!
पदाई कि वजह से ही उसे हॉस्टल भेजना पड़ा ,नहीं तो मैं उसके बिना और वो मेरे बिना कभी नहीं रह सकता .....आखिर अँधा प्यार भी किस काम का कल को वही शिकायत करता कि मैं तो बच्चा था ..आपने क्यूँ नहीं पढाया ....
जन्म दिन पर दूर है दिल तो उदास है पर मुझ से दूर कहाँ है मेरा प्रधुमन ....उसके लिए मैं भगवान् से लम्बी उम्र ,सद बुद्धि ,अच्छा स्वास्थ्य और हर क्षेत्र में कामयाबी की दुआ मांगती हूँ ...एक माँ और क्या मांग सकती है ......

4 comments:

  1. Really bahut achchha likha he Upasna sakhi.

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  2. Really Bachho ki shararte yad kar ke man ko bahla sakte hai jab wo apne se dur hote hai ....

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  3. भगवन बेटे को लंबी आयु और खुशिया दे ....उदास मत होवो सखी ......माँ को जिंदगी के बहुत से इम्तिहान देने पड़ते हैं......

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  4. सच मुच कहाँ दूर है सखी .....
    दिल में है तुम्हारे .......
    आज भी पुकारो ,दहाड़ लगाएगा
    माँ की आवाज़ पर दौड़ा चला आयेगा

    बहुत अच्छी अभिव्यक्ति माँ के दिल आवाज़ .........:)).

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