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शनिवार, 11 मई 2013

मेरी माँ , प्यारी माँ , मम्मा ..


माँ की ममता को कौन नहीं जानता और कोई परिभाषित भी नहीं कर पाया है। सभी को माँ प्यारी लगती है और हर माँ को अपना बच्चा प्रिय होता है। मेरी माँ भी हम चारों बहनों को एक सामान प्यार करती है। कोई भी यह नहीं कहती कि माँ को कौनसी बहन ज्यादा प्यारी लगती है, ऐसा लगता है जैसे उसे ही ज्यादा प्यार करती है। लेकिन मुझे लगता है मैंने मेरी माँ को बहुत सताया है क्यूंकि मैं बचपन में बहुत अधिक शरारती थी।
     मेरा जन्म हुआ तो मैं सामान्य बच्चों की तरह नहीं थी। मेरा एक पैर घुटने से भीतर की और मुड़ा  हुआ था।नानी परेशान थी पर माँ ...! वह तो गोद में लिए बस भाव विभोर थी।
नानी रो ही पड़ी थी , " एक तो दूसरी बार लड़की का जन्म ,उस पर पैर भी मुड़ा  हुआ कौन  इससे शादी करेगा कैसे जिन्दगी कटेगी इसकी ...! "
   माँ बोली , " माँ तुम एक बार इसकी आँखे तो देखो कितनी प्यारी है ..., तुम चिंता मत करो ईश्वर सब अच्छा करेगा। "
  मेरी माँ में सकारात्मकता कूट-कूट कर भरी है , तभी तो हम चारों बहनों में भी यही गुण है। किसी भी परिस्थिति में डगमगाते नहीं है हम।
  खैर , मुड़ा हुआ पैर तो ठीक करवाना ही था। पहले सीधा कर के ऐसे ही कपडे से बाँध कर रखा गया। बाद में पैर को सीधा करने के लिए प्लास्टर किया गया जो की तीन महीने रखा गया।( अब तो माँ को भी याद नहीं है कि कौनसा पैर मुड़ा हुआ था।) तब तक मैं सरक कर चलने की कोशिश करने लगी थी।माँ बताया करती है कि मुझे पानी में भीगने का बहुत शौक था। माँ के इधर -उधर होते ही सीधे पानी के पास जा कर बैठ जाती , जिसके फलस्वरूप पानी पलास्टर के अंदर  चला जाता। अब उसके अंदर से तो पोंछा नहीं जा  सकता था। पानी की अंदर ही अन्दर बदबू होने लगी। रात की माँ के साथ ही सोती थी और सर्दियों में , रजाई में भयंकर बदबू असहनीय थी। लेकिन माँ ने वह भी ख़ुशी -ख़ुशी झेल लिया। माँ की ममता का कोई मोल नहीं चुका सकता है लेकिन मेरी माँ ने तो जो बदबू सहन की उसका मोल मैं कैसे उतारूँ , मेरे पास कोई जवाब नहीं है। मैंने अनजाने में ही बहुत तकलीफ दी है माँ को ...!
    जब बहुत छोटी थी तभी से मुझे भीड़ से बहुत डर  लगता था। माँ जब भी बस से सफर करती तो मैं भीड़ से डर  के माँ के  बाल अपनी दोनों मुट्ठियों में जकड़ लेती थी और घर आने तक नहीं छोडती थी। अब सोचती हूँ माँ को कितनी पीड़ा होती होगी। इस दर्द का कोई मोल है क्या ...?
  मेरी सारी शरारतें - बदमाशियां माँ हंस कर माफ़ कर देती। जबकि मैं अपनी छोटी बहन पूजा को बहुत सताया करती थी। खास तोर से चौपड़ के खेल मे तो जरुर ही पूजा रो कर -हार ही खड़ी होती थी।
  पढाई में हमेशा से अच्छी रहीं है हम चारों बहने , मुझे याद है जब मैं आठवी कक्षा में प्रथम आयी थी तो माँ ने गले लगा कर कितना प्यार किया था। और नवीं कक्षा में विज्ञानं मेले के दौरान मेरा माडल जिला स्तर पर प्रथम आया था और पापा ने जाने नहीं दिया था आगे की प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए  ,तो माँ ने समझाया था कि  मैं ना सही मेरा मोडल तो वहां गया ही है ना , नाम तो तुम्हारा ही होगा। माँ कभी उदास या रोने तो कभी देती ही नहीं है ।
जब हॉस्टल गयी तो माँ रो पड़ी थी कि अब घर ही सुना हो जायेगा क्यूंकि मैं ही थी जो कि घर में बहुत बोलती थी या सारा दिन रेडिओ सुना करती थी।  और नहीं तो बहनों से शरारतें ही करती रहती थी। जब घर आती तो छोटी बहन शिकायत करती थी कि जब से मैं हॉस्टल गयी हूँ तब से माँ कोई भी खाने की वह चीज़ ही नहीं बनाती थी जो मुझे पसंद थीऔर बनती भी तो वह खाती नहीं थी । माँ झट से कह देती कि यह तो मुझे बहुत पसंद है , माँ के तो गले से ही नहीं उतरेगी बल्कि बनाते हुए भी जी दुखेगा। अब मुझे खाने का भी बहुत शौक था तो अधिकतर चीज़ें मुझे पसंद ही होती थी। मुझे कोई ज्यादा महसूस नहीं होता था सिवाय इसके की यह माँ का प्यार है।
 जब बच्चे का भविष्य बनाना हो तो माँ थोड़ी सी सख्त भी हो जाती है। मेरा मन भी हॉस्टल में नहीं लगा , एक महीने तक रोती  ही रही कि मुझे घर ही जाना है यहाँ नहीं रहना। पापा को भी कई बार बुलवा लिया कि मुझे वहां से ले जाओ लेकिन माँ ने सख्त ताकीद की कि यदि वह घर आने की जिद करे तो बाप-बेटी को घर में आने की इजाज़त नहीं है। पापा ने भी मज़ाक किया कि मैं तो हॉस्टल में रह लूंगी लेकिन वे कहाँ जायेंगे इसलिए वो मुझे घर नहीं ले जा सकते।
   लेकिन अब जब मैं खुद माँ हूँ और मेरे दोनों बेटे हॉस्टल में हैं तो मैं माँ होने का दर्द समझ सकती हूँ। माँ का दर्द माँ बनने के बाद ही जाना जा सकता है। लेकिन फिर भी माँ क़र्ज़ तो कोई भी नहीं उतार पाया है। माँ बन जाने के बाद भी।
मैं चाहती हूँ कि माँ हमेशा स्वस्थ रहे और उनका आशीर्वाद और साया हमेशा हमारे साथ रहे।



36 टिप्‍पणियां:

  1. आँखे भीग गई ........नमन उस माँ को

    और ये साथ यूँ ही कायम रहें

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  2. bahut ...bhavpurn rachanaa ...sab aankhon ke samne utar aaya didi ji

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  3. sach mey ankhein nam ho gayi padh kar....maa ko pata nahi kis mitti say bhagwan banate hain.....bhagwan kare unka ashirwad sada bana rahe

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  4. अति सुन्दर ...पूरा बचपन ही लिख दिया ...
    माँ तो ईश्वर का दूसरा रूप ही तो है ..

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  5. उपासना जी,शब्दों के माध्यम से बेहद मर्मस्पर्शी प्चित्रों को उकेरा है ,जिवंत और बोलती तस्बीर

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  6. sahi kaha upasna ji ma ka kerj koi nhi utar sakta ,per ma ki pida ko mahsoos kerle, mera khyal he ma ke liye ye hi bahut he, verna ajkal to ese bhi he jo ye bhi nhi mante ki ma ne kuch kiya aap ki lekhni se apne sab ki bhavnavo ko shabdo me dhal diya bahut achi rachna he

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  7. बहुत अची मन को छु गई

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  8. बचपन याद दिला दी उपासना जी आपने..

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  9. bahut pyara likha ....... maa to maa hoti hain ..........mawa thandiyaa chanwa

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  10. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज रविवार (12-05-2013) के चर्चा मंच 1242 पर लिंक की गई है कृपया पधारें. सूचनार्थ

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  11. तो आपके गुण शुरू से ही उद्घाटित होने लगे थे -माँ को नमन!

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  12. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति उपासना सखी ............मन भर आया

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  13. बेहद मर्मस्पर्शी प्रस्तुति,माँ के चरणों में नमन.

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  14. Bahut hi sunder ...Padhkar aakhe bhar Aayi...Aisa laga Bachpan jee liya...

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  15. माँ से बड़ा दिल किसी के पास नहीं .. बहुत सुन्दर मर्मस्पर्शी प्रस्तुति ..
    मातृदिवस की शुभकामनाएं!

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  16. उपासना सियांग जी सुन्दर यादों संग
    माँ एक रिश्ता जन्म से मृत्यु तक और जन्म जन्म तक बस माँ और माँ

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  17. माँ की ममता दिल को छू गया , मातृ दिवस की शुभकामनाएं
    latest post हे ! भारत के मातायों
    latest postअनुभूति : क्षणिकाएं

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  18. माँ का हाथ जब सर पर हो...तो सारे सुख अपने आप ही झोली में आ जाते हैं

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  19. आपकी पोस्ट मन को अंदर तक भिगो गई ...
    माँ की ममता का छोर नहीं होता कोई ... स्तर साहर की तरह ..
    मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनायें ...

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  20. chhoti chhoti baate lekin in baaton me chhupa athah pyar ...sundar bhavabhivyakti..

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  21. मर्मस्पर्शी भाव ... .मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ...

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  22. माँ ही तो है जो जीवन का आधार होती है
    बहुत मार्मिक और भावुक संस्मरण
    माँ को समर्पित

    मेरी पोस्ट पढ़ें "अम्मा"

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  23. सुकून की तलाश हो जब
    तो मां कह दो
    तुम्‍हें कुछ भी असंभव लगे जब
    तो मां कह दो
    भावपूर्ण प्रस्‍तुति

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  24. बहुत मर्मस्पर्शी प्रस्तुति...

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  25. बहुत मर्मस्पर्शी प्रस्तुति...मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

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  26. ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सब को मातृदिवस की हार्दिक मंगलकामनाएँ !!

    ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 12/05/2019 की बुलेटिन, " माँ की वसीयत बच्चों के नाम “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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