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Saturday, April 11, 2015

नयी ऊर्जा

         बूढ़ा माली परेशान था। उसने छोटा सा घर बनाया था । घर में एक पेड़ भी लगाया था । उसके जाने बाद पेड़ की कौन देखभाल करेगा। कौन सींचेगा उसकी जड़ें। दिन -रात यही परेशानी थी कि इस पर बसेरा करने वाली चिड़ियाँ कहाँ जाएँगी। आज वह है तो सब है। ना रहेगा तो क्या होगा ?
     चिंता करते - करते सो गया एक दिन उसकी छाँव में।  उसने एक स्वप्न देखा। देखा ,पेड़ की चिड़ियाँ अपनी चोंच में पानी भर -भर के जड़ें सींच रही है। पेड़ हरा भरा है। एक अलौकिक चमक है , एक महक है चहुँ और ! बूढ़ा निश्चिन्त हो मुस्कुरा उठा। आँख खुली तो संध्या का धुंधलका छा रहा था। चिड़ियाँ चहक रही थी। घर लौट आने की ख़ुशी में। बूढ़ा देख कर  खुश हो रहा था एक नयी ऊर्जा महसूस कर रहा था।


2 comments:

  1. लोहड़ी की हार्दिक मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल सोमवार (13-04-2015) को "विश्व युवा लेखक प्रोत्साहन दिवस" {चर्चा - 1946} पर भी होगी!
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    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. हार्दिक आभार ...

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