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Thursday, September 25, 2014

लेकिन देवियाँ बोलती कहाँ है



मैं थक गई हूँ देवी की प्रतिमा का रूप धरते -धरते। ये पांडाल की चकाचौंध , शोरगुल मुझे उबा रहे हैं। लोग आते हैं ,निहारते हैं , " अहा कितना सुन्दर रूप है माँ का !" माँ का शांत स्वरूप को तो बस देखते ही बनता है। "
    मेरे अंतर्मन का कोलाहल क्या किसी को नहीं सुनाई देता !  मूर्तिकार को भी नहीं सुनता शायद। तभी तो वह मेरे बाहरी आवरण को ही सजाता -संवारता है कि दाम अच्छा मिल सके।
    वाह रे मानव ! धन का लालची कोई  मुझे मूर्त रूप में बेच जाता है तो  कोई मेरे मूर्त रूप पर चढ़ावा चढ़ा जाता है।मेरे असली स्वरूप की मिट्टी को मिट्टी में दबाता  मेरे शांत रूप को निहारता।
  मैं चुप प्रतिमा बनी अब हारने लगी हूँ। लेकिन देवियाँ बोलती कहाँ है ! मिट्टी की हो या हाड़ -मांस की चुप ही रहा करती है।  

8 comments:

  1. सच, देवियाँ बोलती कहाँ हैं,
    और अगर भूल से कुछ बोलने की हिम्मत की भी तो
    सुनता कौन है?
    हम हर साल देवी को घर में लाते हैं,
    सजाते हैं सवारते हैं और चुनरी उड़ाते हैं,
    और भगवती गौरी सीता की महिमा गाते हैं,
    पर अपने ही घर मैं रह रही देवियों के
    अंतर्मन को पढ़ नहीं पाते हैं ,
    कभी बेटी बना कर कभी बहु बना कर,
    संस्कारों के नाम पर बलि चढ़ाते हैं,
    या तो हम कोख मैं ही बेटी को मारते हैं,
    या फिर चुप रहना, कुछ मत कहना, बस सहना
    की शिक्षा देकर,
    उसे जीवन भर, हर पल, हर समय सताते हैं

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  2. इन्ही देवियो के बलबूते ये संसार चल रहा है पर बोलना मना है...

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (27-09-2014) को "अहसास--शब्दों की लडी में" (चर्चा मंच 1749) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    शारदेय नवरात्रों की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. बहुत गहरी और सटीक बाते ! आज तो आडम्बर का ज़माना है बाहरी रूप रंग को ही लोग देखते है ,अनर्मन की बात को नहीं !
    नवरात्रि की हार्दीक शुभकामनाएं !
    शुम्भ निशुम्भ बध -भाग ४

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  5. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 29/09/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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  6. Bahut sunder....sach me deviyaa bolati nahi...isliye shayad ki jab wo bolegi to kahin kanpati fat na jaaye logo ki.. uski aawaz me kuch dard hai....wo chup hai...!!!

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  7. Deviyaan bolti kahan hai..sach mein chup hi rah jaati hain !

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